हमारा शरीर अक्सर किसी परेशानी के बारे में संकेत देता है। सिरदर्द, थकान, खांसी, सीने में दर्द, सांस फूलना या पेट की परेशानी जैसी समस्याएं कई बार सामान्य कारणों से भी हो सकती हैं। लेकिन अगर कोई लक्षण अचानक शुरू हो, बहुत ज्यादा हो, लंबे समय तक बना रहे या बार-बार वापस आए, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर लक्षण का मतलब किसी गंभीर बीमारी से नहीं होता। फिर भी, सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से समस्या का कारण समझने और जरूरत पड़ने पर सही जांच शुरू करने में मदद मिल सकती है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में मरीज की जरूरत के अनुसार अलग-अलग डायग्नोस्टिक और इमेजिंग जांच उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
सीने में दर्द या दबाव ऐसा लक्षण है जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर जब यह अचानक शुरू हो, कुछ मिनटों से ज्यादा रहे या बार-बार हो। हार्ट अटैक के दौरान सीने के बीच या बाईं तरफ दबाव, जकड़न या दर्द महसूस हो सकता है। यह परेशानी हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक भी जा सकती है। इसके साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, कमजोरी, जी मिचलाना या उल्टी भी हो सकते हैं। हर सीने का दर्द हार्ट अटैक के कारण नहीं होता, लेकिन अचानक या लगातार रहने वाले सीने के दर्द में तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है।
थोड़ी ज्यादा शारीरिक मेहनत के बाद सांस फूलना सामान्य हो सकता है। लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी होना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। अगर सांस फूलने के साथ सीने में दर्द, चक्कर, तेज धड़कन, बेहोशी या खून वाली खांसी हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए। ऐसे लक्षण कुछ गंभीर हृदय या फेफड़ों की समस्याओं में दिखाई दे सकते हैं।
अगर अचानक चेहरे, हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो, खासकर शरीर के एक तरफ, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक बोलने में परेशानी, बात समझने में दिक्कत, देखने में बदलाव, चक्कर, चलने में परेशानी या बिना किसी स्पष्ट कारण के तेज सिरदर्द भी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लेनी चाहिए। लक्षण कुछ मिनट बाद ठीक हो जाएं, तब भी उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह TIA यानी मिनी-स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
अधिकतर सिरदर्द गंभीर कारणों से नहीं होता। लेकिन अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज शुरू हो, पहले होने वाले सिरदर्द से बिल्कुल अलग हो या इसके साथ कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में बदलाव, भ्रम या चलने में परेशानी हो, तो तुरंत मेडिकल जांच जरूरी है। बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द स्ट्रोक के चेतावनी संकेतों में शामिल हो सकता है।
अगर आप डाइट या एक्सरसाइज में कोई खास बदलाव किए बिना लगातार वजन कम कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बिना कोशिश के वजन कम होने के कई कारण हो सकते हैं। यह खान-पान में बदलाव, पाचन संबंधी समस्या, हार्मोन से जुड़ी परेशानी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जुड़ा हो सकता है। इसका मतलब हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होता, लेकिन अगर वजन लगातार कम हो रहा है और इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं है, तो जांच करवाना बेहतर होता है।
बुखार अक्सर शरीर में संक्रमण होने पर आता है और कई बार कुछ समय में ठीक हो जाता है। लेकिन अगर बुखार लंबे समय तक बना रहे, बार-बार वापस आए या इसके साथ दूसरे परेशान करने वाले लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। तेज कमजोरी, भ्रम, सांस लेने में परेशानी, लगातार सीने या पेट में दर्द और शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षणों के साथ बुखार होने पर जल्द मेडिकल मदद लेना जरूरी हो सकता है।
अचानक धुंधला दिखाई देना, एक या दोनों आंखों से देखने में परेशानी होना या अचानक नजर कम होना ऐसा लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर अचानक देखने में परेशानी के साथ शरीर के एक तरफ कमजोरी, बोलने में परेशानी, चक्कर या संतुलन बिगड़ने जैसी समस्या भी हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है और तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है।
खांसी कई सामान्य कारणों से हो सकती है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे, बार-बार हो या धीरे-धीरे बढ़ रही हो, तो इसकी जांच करवानी चाहिए। अगर खांसी के साथ सांस फूलना, सीने में दर्द, बुखार, खून आना या बिना कोशिश के वजन कम होना जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से जल्द सलाह लें। डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, CT scan या दूसरी जांच की सलाह दे सकते हैं।
पेट में कभी-कभी दर्द होना सामान्य हो सकता है, लेकिन बहुत तेज, लगातार या बढ़ता हुआ पेट दर्द नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर पेट दर्द के साथ बार-बार उल्टी, बुखार, मल या उल्टी में खून, बेहोशी, बहुत ज्यादा कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत हो सकती है। दर्द कहां है, कितनी देर से है और उसके साथ कौन-से दूसरे लक्षण हैं, इन बातों के आधार पर डॉक्टर आगे की जांच तय करते हैं।
लगातार पेट फूलना, बार-बार उल्टी होना, निगलने में परेशानी, मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव या लंबे समय से पाचन की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं, जैसे खान-पान में बदलाव, संक्रमण, दवाओं का असर या पाचन तंत्र से जुड़ी कोई समस्या। अगर परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
काम करने के बाद थकान होना सामान्य है, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। थकान के कई कारण हो सकते हैं, जैसे नींद की कमी, पोषण की कमी, संक्रमण, हार्मोन से जुड़ी समस्या या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां। अगर थकान के साथ सांस फूलना, चक्कर, वजन कम होना, बुखार या कोई दूसरा नया लक्षण भी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कुछ लक्षणों में नियमित डॉक्टर की अपॉइंटमेंट का इंतजार नहीं करना चाहिए। अचानक सांस लेने में बहुत परेशानी, लगातार सीने में दर्द या दबाव, शरीर के एक तरफ अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, अचानक नजर में बदलाव, बेहोशी या स्ट्रोक जैसे लक्षण होने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें। स्ट्रोक के मामले में BE FAST को याद रखना उपयोगी हो सकता है—Balance यानी संतुलन बिगड़ना, Eyes यानी नज़र में बदलाव, Face यानी चेहरे का एक तरफ झुकना, Arms यानी हाथ में कमजोरी और Speech यानी बोलने में परेशानी। इनमें से कोई लक्षण अचानक दिखाई दे तो समय बर्बाद किए बिना इमरजेंसी मदद लेनी चाहिए।
किसी लक्षण को नजरअंदाज करने से कई बार बीमारी का पता लगाने में देरी हो सकती है। दूसरी तरफ, हर लक्षण का मतलब गंभीर बीमारी भी नहीं होता। डॉक्टर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और दूसरे जोखिमों को ध्यान में रखते हैं। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, इमेजिंग या दूसरी डायग्नोस्टिक जांच कराई जा सकती है। इन जांचों का उद्देश्य केवल बीमारी ढूंढना नहीं होता। ये डॉक्टर को लक्षणों के संभावित कारण समझने, किसी बीमारी की स्थिति जानने और समय के साथ बदलाव को देखने में भी मदद कर सकती हैं।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में मरीज की जरूरत के अनुसार अलग-अलग डायग्नोस्टिक और इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड टेस्ट, CT scan, MRI, अल्ट्रासाउंड, X-ray, PET-CT और अन्य विशेष जांचों की जरूरत पड़ सकती है। हर मरीज के लिए जांच अलग हो सकती है और सही टेस्ट का चुनाव उसकी मेडिकल स्थिति के आधार पर किया जाता है।
हमारा शरीर कई तरह के संकेतों के जरिए बताता है कि उसे ध्यान की जरूरत है। हर लक्षण गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन अचानक, बहुत तेज, लगातार या बिना किसी स्पष्ट कारण के होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने या देखने में परेशानी, बहुत तेज सिरदर्द, बिना कोशिश के वजन कम होना और लंबे समय तक रहने वाली खांसी या पाचन संबंधी परेशानी में समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर मेडिकल सलाह और जरूरत के अनुसार डायग्नोस्टिक जांच से समस्या के कारण को समझने और आगे की देखभाल तय करने में मदद मिल सकती है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक और इमेजिंग सुविधाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार मरीज की जांच में सहायता कर सकती हैं।